सोमवार, 15 दिसंबर 2025

जब हालात कहते हैं रुक जाओ


जब हालात कहते हैं रुक जाओ , और दिल कहता है आगे बढ़ो

सुबह के पाँच बजे थे। अँधेरा अभी पूरी तरह से छटा नहीं था

रमेश, किशोर  को सोता 

छोड़ो  काम पर निकल जाता है

जेब में थे सपने ,
और जिंदगी में थीं बातें।

लोग कहते थे -

इतनी मेहनत से क्या होगा ?”

लेकिन  रमेश  ने हर दिन खुद से एक ही कहा था -
"
आज नहीं रुका , तो कल बदल सकता है "

ये है हालात की पहली कहानी।

आख़िर क्या होता है ?

आख़िरकार कोई बड़ी बात नहीं होती। ये वो ताक़त है जो कहता है -

  • थक गए हो , फिर भी चलो
  • डर लग रहा है , फिर भी कोशिश करो
  • हार हुई है , फिर भी उठो

जब भी कोई  बच्चा स्कूल जाता है तो बच्चों की मुस्कान होती है - 

वही याद है।

एक आम इंसान की कहानी

सीमा  को  पढ़ाई  की चाहत थी ,

लेकिन घर की समस्या ठीक नहीं थी।

दिन में काम ,
रात में किताब।

नींद कम थी ,
पर सपना बड़ा।

एक दिन किसी ने कहा -

अब इस उम्र में क्या पढ़ाई ?”

सीमा रेखाएं  बाधक नहीं बनीं

और अगली सुबह किताब खोल ली।

आपका  अदृश्य पसंदीदा काम करता है।

 आख़िरी चीज़ कैसी है ?

अदृश्य दृश्य दिखाई नहीं देता ,
यह प्रतिदिन बनता है।

  • प्रतिदिन पुनः आरंभ से
  • रोज़ कोशिश करने से
  • रोज खुद से न जगह से हार

दिया पूरा रोशनदान नहीं ,
बल्कि अँधेरे से अँधेरा   दूर कर देता है।  

असली जीत कहाँ है ?

राम अमीर नहीं बने ,
सीमा प्रसिद्ध नहीं हुई।

लेकिन

  • रमेश ने हार नहीं मानी
  • सीमा ने खुद को नहीं छोड़ा

यही असली जीत है।

क्योंकि जो इंसान खुद से हारता है ,
वह सब कुछ हारता है।

कहानी का मतलब (आपके लिए)

अगर आप यह पढ़ रहे हैं ,
तो शायद आप भी किसी लड़ाई में हैं -

  • जिंदगी से
  • हालात से
  • या खुद से

याद रखिए

बड़े लोगों की कहानियाँ  नहीं, 

हार की नहीं, बल्कि लोगों की होती है। 

आज बस इतना ही - हार मत मानो।